श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 12.13.5

द्वादश स्कन्ध · अध्याय 13 · अथ त्रयोदशोऽध्यायः

दशाष्टौ श्रीभागवतं नारदं पंचविंशतिः।

मार्कण्डं नव वाह्नं च दशपंच चतुःशतम्॥ ५

daśāṣṭau śrībhāgavataṃ nāradaṃ paṃcaviṃśatiḥ|

mārkaṇḍaṃ nava vāhnaṃ ca daśapaṃca catuḥśatam|| 5

अर्थ

श्रीमद्भागवतमें अठारह हजार, नारदपुराणमें पचीस हजार, मार्कण्डेयपुराणमें नौ हजार तथा अग्‍निपुराणमें पन्द्रह हजार चार सौ श्‍लोक हैं॥ ५॥

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