॥ श्रीहरिः ॥
दशाष्टौ श्रीभागवतं नारदं पंचविंशतिः।
मार्कण्डं नव वाह्नं च दशपंच चतुःशतम्॥ ५
daśāṣṭau śrībhāgavataṃ nāradaṃ paṃcaviṃśatiḥ|
mārkaṇḍaṃ nava vāhnaṃ ca daśapaṃca catuḥśatam|| 5
अर्थ
श्रीमद्भागवतमें अठारह हजार, नारदपुराणमें पचीस हजार, मार्कण्डेयपुराणमें नौ हजार तथा अग्निपुराणमें पन्द्रह हजार चार सौ श्लोक हैं॥ ५॥
दशाष्टौ श्रीभागवतं नारदं पंचविंशतिः।
मार्कण्डं नव वाह्नं च दशपंच चतुःशतम्॥ ५
श्रीमद्भागवतमें अठारह हजार, नारदपुराणमें पचीस हजार, मार्कण्डेयपुराणमें नौ हजार तथा अग्निपुराणमें पन्द्रह हजार चार सौ श्लोक हैं॥ ५॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 12.13.5 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 980) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/12/13/5/