श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 12.11.15

द्वादश स्कन्ध · अध्याय 11 · अथैकादशोऽध्यायः

नभोनिभं नभस्तत्त्वमसिं चर्म तमोमयम्।

कालरूपं धनुः शार्ङ्गं तथा कर्ममयेषुधिम्॥ १५

nabhonibhaṃ nabhastattvamasiṃ carma tamomayam|

kālarūpaṃ dhanuḥ śārṅgaṃ tathā karmamayeṣudhim|| 15

अर्थ

आकाशके समान निर्मल आकाशस्वरूप खड्ग, तमोमय अज्ञानरूप ढाल, कालरूप शार्ङ्गधनुष और कर्मका ही तरकस धारण किये हुए हैं॥ १५॥

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