श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 12.11.14

द्वादश स्कन्ध · अध्याय 11 · अथैकादशोऽध्यायः

ओजःसहोबलयुतं मुख्यतत्त्वं गदां दधत्।

अपां तत्त्वं दरवरं तेजस्तत्त्वं सुदर्शनम्॥ १४

ojaḥsahobalayutaṃ mukhyatattvaṃ gadāṃ dadhat|

apāṃ tattvaṃ daravaraṃ tejastattvaṃ sudarśanam|| 14

अर्थ

वे मन, इन्द्रिय और शरीरसम्बन्धी शक्तियोंसे युक्त प्राण-तत्त्वरूप कौमोदकी गदा, जलतत्त्वरूप पांचजन्य शंख और तेजस्तत्त्वरूप सुदर्शनचक्रको धारण करते हैं॥ १४॥

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