श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 11.9.32

एकादश स्कन्ध · अध्याय 9 · अथ नवमोऽध्यायः

श्रीभगवानुवाच

इत्युक्त्वा स यदुं विप्रस्तमामन्त्र्य गभीरधीः।✎ 2148

वन्दितोऽभ्यर्थितो राज्ञा ययौ प्रीतो यथागतम्॥ ३२

ityuktvā sa yaduṃ viprastamāmantrya gabhīradhīḥ|

vandito'bhyarthito rājñā yayau prīto yathāgatam|| 32

अर्थ

भगवान् श्रीकृष्णने कहा—प्यारे उद्धव! गम्भीरबुद्धि अवधूत दत्तात्रेयने राजा यदुको इस प्रकार उपदेश किया। यदुने उनकी पूजा और वन्दना की, दत्तात्रेयजी उनसे अनुमति लेकर बड़ी प्रसन्‍नतासे इच्छानुसार पधार गये॥ ३२॥

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #2148 यूनिकोड-रूप (अक्षर वही): मन्त्रॺ गभी → मन्त्र्य गभी

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