॥ श्रीहरिः ॥
एकादश स्कन्ध
श्रीमद्भागवतमहापुराणम्
एकादशः स्कन्धः
- 1अथ प्रथमोऽध्यायःयदुवंशको ऋषियोंका शाप24 श्लोक
पृष्ठ 709 - 2अथ द्वितीयोऽध्यायःवसुदेवजीके पास श्रीनारदजीका आना और उन्हें राजा जनक तथा नौ योगीश्वरोंका संवाद सुनाना55 श्लोक
पृष्ठ 713 - 3अथ तृतीयोऽध्यायःमाया, मायासे पार होनेके उपाय तथा ब्रह्म और कर्मयोगका निरूपण55 श्लोक
पृष्ठ 721 - 4अथ चतुर्थोऽध्यायःभगवान्के अवतारोंका वर्णन23 श्लोक
पृष्ठ 732 - 5अथ पञ्चमोऽध्यायःभक्तिहीन पुरुषोंकी गति और भगवान्की पूजाविधिका वर्णन52 श्लोक
पृष्ठ 736 - 6अथ षष्ठोऽध्यायःदेवताओंकी भगवान्से स्वधाम सिधारनेके लिये प्रार्थना तथा यादवोंको प्रभासक्षेत्र जानेकी तैयारी करते देखकर उद्धवका भगवान्के पास आना50 श्लोक
पृष्ठ 744 - 7अथ सप्तमोऽध्यायःअवधूतोपाख्यान—पृथ्वीसे लेकर कबूतरतक आठ गुरुओंकी कथा74 श्लोक
पृष्ठ 751 - 8अथाष्टमोऽध्यायःअवधूतोपाख्यान—अजगरसे लेकर पिंगलातक नौ गुरुओंकी कथा44 श्लोक
पृष्ठ 763 - 9अथ नवमोऽध्यायःअवधूतोपाख्यान—कुररसे लेकर भृंगीतक सात गुरुओंकी कथा33 श्लोक
पृष्ठ 769 - 10अथ दशमोऽध्यायःलौकिक तथा पारलौकिक भोगोंकी असारताका निरूपण37 श्लोक
पृष्ठ 774 - 11अथैकादशोऽध्यायःबद्ध, मुक्त और भक्तजनोंके लक्षण49 श्लोक
पृष्ठ 781 - 12अथ द्वादशोऽध्यायःसत्संगकी महिमा और कर्म तथा कर्मत्यागकी विधि24 श्लोक
पृष्ठ 787 - 13अथ त्रयोदशोऽध्यायःहंसरूपसे सनकादिको दिये हुए उपदेशका वर्णन42 श्लोक
पृष्ठ 792 - 14अथ चतुर्दशोऽध्यायःभक्तियोगकी महिमा तथा ध्यानविधिका वर्णन46 श्लोक
पृष्ठ 798 - 15अथ पञ्चदशोऽध्यायःभिन्न-भिन्न सिद्धियोंके नाम और लक्षण36 श्लोक
पृष्ठ 804 - 16अथ षोडशोऽध्यायःभगवान्की विभूतियोंका वर्णन44 श्लोक
पृष्ठ 809 - 17अथ सप्तदशोऽध्यायःवर्णाश्रम-धर्म-निरूपण58 श्लोक
पृष्ठ 814 - 18अथाष्टादशोऽध्यायःवानप्रस्थ और संन्यासीके धर्म48 श्लोक
पृष्ठ 821 - 19अथैकोनविंशोऽध्यायःभक्ति, ज्ञान और यम-नियमादि साधनोंका वर्णन45 श्लोक
पृष्ठ 827 - 20अथ विंशोऽध्यायःज्ञानयोग, कर्मयोग और भक्तियोग37 श्लोक
पृष्ठ 833 - 21अथैकविंशोऽध्यायःगुण-दोष-व्यवस्थाका स्वरूप और रहस्य43 श्लोक
पृष्ठ 838 - 22अथ द्वाविंशोऽध्यायःतत्त्वोंकी संख्या और पुरुष-प्रकृति-विवेक60 श्लोक
पृष्ठ 846 - 23अथ त्रयोविंशोऽध्यायःएक तितिक्षु ब्राह्मणका इतिहास62 श्लोक
पृष्ठ 855 - 24अथ चतुर्विंशोऽध्यायःसांख्ययोग29 श्लोक
पृष्ठ 862 - 25अथ पञ्चविंशोऽध्यायःतीनों गुणोंकी वृत्तियोंका निरूपण36 श्लोक
पृष्ठ 866 - 26अथ षड्विंशोऽध्यायःपुरूरवाकी वैराग्योक्ति35 श्लोक
पृष्ठ 871 - 27अथ सप्तविंशोऽध्यायःक्रियायोगका वर्णन55 श्लोक
पृष्ठ 875 - 28अथाष्टाविंशोऽध्यायःपरमार्थनिरूपण44 श्लोक
पृष्ठ 882 - 29अथैकोनत्रिंशोऽध्यायःभागवतधर्मोंका निरूपण और उद्धवजीका बदरिकाश्रमगमन49 श्लोक
पृष्ठ 890 - 30अथ त्रिंशोऽध्यायःयदुकुलका संहार50 श्लोक
पृष्ठ 897 - 31अथैकत्रिंशोऽध्यायःश्रीभगवान्का स्वधामगमन28 श्लोक
पृष्ठ 903
॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय॥