श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 11.5.46

एकादश स्कन्ध · अध्याय 5 · अथ पञ्चमोऽध्यायः

युवयोः खलु दम्पत्योर्यशसा पूरितं जगत्।

पुत्रतामगमद् यद् वां भगवानीश्‍वरो हरिः॥ ४६

yuvayoḥ khalu dampatyoryaśasā pūritaṃ jagat|

putratāmagamad yad vāṃ bhagavānīśvaro hariḥ|| 46

अर्थ

वसुदेवजी! तुम्हारे और देवकीके यशसे तो सारा जगत् भरपूर हो रहा है; क्योंकि सर्वशक्तिमान् भगवान् श्रीकृष्ण तुम्हारे पुत्रके रूपमें अवतीर्ण हुए हैं॥ ४६॥

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