श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 11.31.22

एकादश स्कन्ध · अध्याय 31 · अथैकत्रिंशोऽध्यायः

बन्धूनां नष्टगोत्राणामर्जुनः साम्परायिकम्।

हतानां कारयामास यथावदनुपूर्वशः॥ २२

bandhūnāṃ naṣṭagotrāṇāmarjunaḥ sāmparāyikam|

hatānāṃ kārayāmāsa yathāvadanupūrvaśaḥ|| 22

अर्थ

यदुवंशके मृत व्यक्तियोंमें जिनको कोई पिण्ड देनेवाला न था, उनका श्राद्ध अर्जुनने क्रमशः विधिपूर्वक करवाया॥ २२॥✎ 1778

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1778 पंक्तिके अन्तका योजक-चिह्न: देने-वाला → देनेवाला

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