परीक्षित्! अर्जुन अपने प्रियतम और सखा भगवान् श्रीकृष्णके विरहसे पहले तो अत्यन्त व्याकुल हो गये; फिर उन्होंने उन्हींके गीतोक्त सदु-पदेशोंका स्मरण करके अपने मनको सँभाला॥ २१॥✎ 1778
अर्जुनः प्रेयसः सख्युः कृष्णस्य विरहातुरः।
आत्मानं सान्त्वयामास कृष्णगीतैः सदुक्तिभिः॥ २१
परीक्षित्! अर्जुन अपने प्रियतम और सखा भगवान् श्रीकृष्णके विरहसे पहले तो अत्यन्त व्याकुल हो गये; फिर उन्होंने उन्हींके गीतोक्त सदु-पदेशोंका स्मरण करके अपने मनको सँभाला॥ २१॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 11.31.21 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 905) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/11/31/21/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)