उद्धवजी! यह सम्पूर्ण ब्रह्मविद्याका रहस्य मैंने संक्षेप और विस्तारसे तुम्हें सुना दिया। इस रहस्यको समझना मनुष्योंकी तो कौन कहे, देवताओंके लिये भी अत्यन्त कठिन है॥ २३॥
एष तेऽभिहितः कृत्स्नो ब्रह्मवादस्य सङ्ग्रहः।
समासव्यासविधिना देवानामपि दुर्गमः॥ २३
उद्धवजी! यह सम्पूर्ण ब्रह्मविद्याका रहस्य मैंने संक्षेप और विस्तारसे तुम्हें सुना दिया। इस रहस्यको समझना मनुष्योंकी तो कौन कहे, देवताओंके लिये भी अत्यन्त कठिन है॥ २३॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 11.29.23 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 893) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/11/29/23/