श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 11.29.22

एकादश स्कन्ध · अध्याय 29 · अथैकोनत्रिंशोऽध्यायः

एषा बुद्धिमतां बुद्धिर्मनीषा च मनीषिणाम्।

यत् सत्यमनृतेनेह मर्त्येनाप्नोति मामृतम्॥ २२

eṣā buddhimatāṃ buddhirmanīṣā ca manīṣiṇām|

yat satyamanṛteneha martyenāpnoti māmṛtam|| 22

अर्थ

विवेकियोंके विवेक और चतुरोंकी चतुराईकी पराकाष्ठा इसीमें है कि वे इस विनाशी और असत्य शरीरके द्वारा मुझ अविनाशी एवं सत्य तत्त्वको प्राप्त कर लें॥ २२॥✎ 2001

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
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