श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 11.27.6

एकादश स्कन्ध · अध्याय 27 · अथ सप्तविंशोऽध्यायः

श्रीभगवानुवाच

न ह्यन्तोऽनन्तपारस्य कर्मकाण्डस्य चोद्धव।

संक्षिप्तं वर्णयिष्यामि यथावदनुपूर्वशः॥ ६

na hyanto'nantapārasya karmakāṇḍasya coddhava|

saṃkṣiptaṃ varṇayiṣyāmi yathāvadanupūrvaśaḥ|| 6

अर्थ

भगवान् श्रीकृष्णने कहा—उद्धवजी! कर्मकाण्डका इतना विस्तार है कि उसकी कोई सीमा नहीं है; इसलिये मैं उसे थोड़ेमें ही पूर्वापर-क्रमसे विधिपूर्वक वर्णन करता हूँ॥ ६॥

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