श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 11.27.7

एकादश स्कन्ध · अध्याय 27 · अथ सप्तविंशोऽध्यायः

वैदिकस्तान्त्रिको मिश्र इति मे त्रिविधो मखः।

त्रयाणामीप्सितेनैव विधिना मां समर्चयेत्॥ ७

vaidikastāntriko miśra iti me trividho makhaḥ|

trayāṇāmīpsitenaiva vidhinā māṃ samarcayet|| 7

अर्थ

मेरी पूजाकी तीन विधियाँ हैं—वैदिक, तान्त्रिक और मिश्रित। इन तीनोंमेंसे मेरे भक्तको जो भी अपने अनुकूल जान पड़े, उसी विधिसे मेरी आराधना करनी चाहिये॥ ७॥

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