श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 11.25.9

एकादश स्कन्ध · अध्याय 25 · अथ पञ्चविंशोऽध्यायः

पुरुषं सत्त्वसंयुक्तमनुमीयाच्छमादिभिः।

कामादिभी रजोयुक्तं क्रोधाद्यैस्तमसा युतम्॥ ९

puruṣaṃ sattvasaṃyuktamanumīyācchamādibhiḥ|

kāmādibhī rajoyuktaṃ krodhādyaistamasā yutam|| 9

अर्थ

मानसिक शान्ति और जितेन्द्रियता आदि गुणोंसे सत्त्वगुणी पुरुषकी, कामना आदिसे रजोगुणी पुरुषकी और क्रोध-हिंसा आदिसे तमोगुणी पुरुषकी पहचान करे॥ ९॥

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