॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 11.25.7
धर्मे चार्थे च कामे च यदासौ परिनिष्ठितः।
गुणानां सन्निकर्षोऽयं श्रद्धारतिधनावहः॥ ७
dharme cārthe ca kāme ca yadāsau pariniṣṭhitaḥ|
guṇānāṃ sannikarṣo'yaṃ śraddhāratidhanāvahaḥ|| 7
अर्थ
जब मनुष्य धर्म, अर्थ और काममें संलग्न रहता है, तब उसे सत्त्वगुणसे श्रद्धा, रजोगुणसे रति और तमोगुणसे धनकी प्राप्ति होती है। यह भी गुणोंका मिश्रण ही है॥ ७॥