॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 11.23.27
किं धनैर्धनदैर्वा किं कामैर्वा कामदैरुत।
मृत्युना ग्रस्यमानस्य कर्मभिर्वोत जन्मदैः॥ २७
kiṃ dhanairdhanadairvā kiṃ kāmairvā kāmadairuta|
mṛtyunā grasyamānasya karmabhirvota janmadaiḥ|| 27
अर्थ
यह मनुष्य-शरीर कालके विकराल गालमें पड़ा हुआ है। इसको धनसे, धन देनेवाले देवताओं और लोगोंसे, भोगवासनाओं और उनको पूर्ण करनेवालोंसे तथा पुनः-पुनः जन्म-मृत्युके चक्करमें डालनेवाले सकाम कर्मोंसे लाभ ही क्या है?॥ २७॥