श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 11.19.21

एकादश स्कन्ध · अध्याय 19 · अथैकोनविंशोऽध्यायः

आदरः परिचर्यायां सर्वाङ्गैरभिवन्दनम्।

मद्भक्तपूजाभ्यधिका सर्वभूतेषु मन्मतिः॥ २१

ādaraḥ paricaryāyāṃ sarvāṅgairabhivandanam|

madbhaktapūjābhyadhikā sarvabhūteṣu manmatiḥ|| 21

अर्थ

मेरी सेवा-पूजामें प्रेम रखे और सामने साष्टांग लोटकर प्रणाम करे; मेरे भक्तोंकी पूजा मेरी पूजासे बढ़कर करे और समस्त प्राणियोंमें मुझे ही देखे॥ २१॥

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