श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 11.19.20

एकादश स्कन्ध · अध्याय 19 · अथैकोनविंशोऽध्यायः

श्रद्धामृतकथायां मे शश्‍वन्मदनुकीर्तनम्।

परिनिष्ठा च पूजायां स्तुतिभिः स्तवनं मम॥ २०

śraddhāmṛtakathāyāṃ me śaśvanmadanukīrtanam|

pariniṣṭhā ca pūjāyāṃ stutibhiḥ stavanaṃ mama|| 20

अर्थ

जो मेरी भक्ति प्राप्त करना चाहता हो, वह मेरी अमृतमयी कथामें श्रद्धा रखे; निरन्तर मेरे गुण-लीला और नामोंका संकीर्तन करे; मेरी पूजामें अत्यन्त निष्ठा रखे और स्तोत्रोंके द्वारा मेरी स्तुति करे॥ २०॥

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