श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 11.17.24

एकादश स्कन्ध · अध्याय 17 · अथ सप्तदशोऽध्यायः

स्नानभोजनहोमेषु जपोच्चारे५ च वाग्यतः।

नच्छिन्द्यान्‍नखरोमाणि कक्षोपस्थगतान्यपि॥ २४

snānabhojanahomeṣu japoccāre ca vāgyataḥ|

nacchindyānnakharomāṇi kakṣopasthagatānyapi|| 24

अर्थ

स्नान, भोजन, हवन, जप और मल-मूत्र त्यागके समय मौन रहे। और कक्ष तथा गुप्तेन्द्रियके बाल और नाखूनोंको कभी न काटे॥ २४॥

टिप्पणियाँ

  1. ५

    मन्त्रोच्चारे।

    (मुद्रित पृष्ठ 816)

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