॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 11.17.23
मेखलाजिनदण्डाक्षब्रह्मसूत्रकमण्डलून् ।
जटिलोऽधौतदद्वासोऽरक्तपीठः कुशान् दधत्॥ २३
mekhalājinadaṇḍākṣabrahmasūtrakamaṇḍalūn |
jaṭilo'dhautadadvāso'raktapīṭhaḥ kuśān dadhat|| 23
अर्थ
मेखला, मृगचर्म, वर्णके अनुसार दण्ड, रुद्राक्षकी माला, यज्ञोपवीत और कमण्डलु धारण करे। सिरपर जटा रखे, शौकीनीके लिये दाँत और वस्त्र न धोवे, रंगीन आसनपर न बैठे और कुश धारण करे॥ २३॥