॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 11.17.21
अहिंसा सत्यमस्तेयमकामक्रोधलोभता।
भूतप्रियहितेहा च धर्मोऽयं सार्ववर्णिकः॥ २१
ahiṃsā satyamasteyamakāmakrodhalobhatā|
bhūtapriyahitehā ca dharmo'yaṃ sārvavarṇikaḥ|| 21
अर्थ
उद्धवजी! चारों वर्णों और चारों आश्रमोंके लिये साधारण धर्म यह है कि मन, वाणी और शरीरसे किसीकी हिंसा न करें; सत्यपर दृढ़ रहें; चोरी न करें; काम, क्रोध तथा लोभसे बचें और जिन कामोंके करनेसे समस्त प्राणियोंकी प्रसन्नता और उनका भला हो, वही करें॥ २१॥