श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 11.1.16

एकादश स्कन्ध · अध्याय 1 · अथ प्रथमोऽध्यायः

एवं प्रलब्धा मुनयस्तानूचुः कुपिता नृप।

जनयिष्यति वो मन्दा मुसलं कुलनाशनम्॥ १६

evaṃ pralabdhā munayastānūcuḥ kupitā nṛpa|

janayiṣyati vo mandā musalaṃ kulanāśanam|| 16

अर्थ

परीक्षित्! जब उन कुमारोंने इस प्रकार उन ऋषि-मुनियोंको धोखा देना चाहा, तब वे भगवत्प्रेरणासे क्रोधित हो उठे। उन्होंने कहा—‘मूर्खो! यह एक ऐसा मूसल पैदा करेगी, जो तुम्हारे कुलका नाश करनेवाला होगा॥ १६॥

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