श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 11.1.17

एकादश स्कन्ध · अध्याय 1 · अथ प्रथमोऽध्यायः

तच्छ्रुत्वा तेऽतिसन्त्रस्ता विमुच्य सहसोदरम्।

साम्बस्य ददृशुस्तस्मिन् मुसलं खल्वयस्मयम्॥ १७

tacchrutvā te'tisantrastā vimucya sahasodaram|

sāmbasya dadṛśustasmin musalaṃ khalvayasmayam|| 17

अर्थ

मुनियोंकी यह बात सुनकर वे बालक बहुत ही डर गये। उन्होंने तुरंत साम्बका पेट खोलकर देखा तो सचमुच उसमें एक लोहेका मूसल मिला॥ १७॥

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