॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 10.90.6
प्रोत्फुल्लोत्पलकह्लारकुमुदाम्भोजरेणुभिः।
वासितामलतोयेषु कूजद्द्विजकुलेषु च॥ ६
protphullotpalakahlārakumudāmbhojareṇubhiḥ|
vāsitāmalatoyeṣu kūjaddvijakuleṣu ca|| 6
अर्थ
सभी पत्नियोंके महलोंमें सुन्दर-सुन्दर सरोवर थे। उनका निर्मल जल खिले हुए नीले, पीले, श्वेत, लाल आदि भाँति-भाँतिके कमलोंके परागसे मँहकता रहता था। उनमें झुंड-के-झुंड हंस, सारस आदि सुन्दर-सुन्दर पक्षी चहकते रहते थे। भगवान् श्रीकृष्ण उन जलाशयोंमें तथा कभी-कभी नदियोंके जलमें भी प्रवेश कर अपनी पत्नियोंके साथ जल-विहार करते थे। भगवान्के साथ विहार करनेवाली पत्नियाँ जब उन्हें अपने भुजपाशमें बाँध लेतीं, आलिंगन करतीं, तब भगवान्के श्रीअंगोंमें उनके वक्षःस्थलकी केसर लग जाती थी॥ ६-७॥✎ 1447 1448