परीक्षित्! प्राचीन कालमें देवासुरसंग्रामके समय बहुत-से भयंकर असुर मारे गये थे। वे ही मनुष्योंमें उत्पन्न हुए और बड़े घमंडसे जनताको सताने लगे॥ ४३॥
देवासुराहवहता दैतेया ये सुदारुणाः।
ते चोत्पन्ना मनुष्येषु प्रजा दृप्ता बबाधिरे॥ ४३
परीक्षित्! प्राचीन कालमें देवासुरसंग्रामके समय बहुत-से भयंकर असुर मारे गये थे। वे ही मनुष्योंमें उत्पन्न हुए और बड़े घमंडसे जनताको सताने लगे॥ ४३॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.90.43 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 707) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/90/43/