श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.90.43

दशम स्कन्ध · अध्याय 90 · अथ नवतितमोऽध्यायः

देवासुराहवहता दैतेया ये सुदारुणाः।

ते चोत्पन्‍ना मनुष्येषु प्रजा दृप्ता बबाधिरे॥ ४३

devāsurāhavahatā daiteyā ye sudāruṇāḥ|

te cotpannā manuṣyeṣu prajā dṛptā babādhire|| 43

अर्थ

परीक्षित्! प्राचीन कालमें देवासुरसंग्रामके समय बहुत-से भयंकर असुर मारे गये थे। वे ही मनुष्योंमें उत्पन्‍न हुए और बड़े घमंडसे जनताको सताने लगे॥ ४३॥

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