उनका दमन करनेके लिये भगवान्की आज्ञासे देवताओंने ही यदुवंशमें अवतार लिया था। परीक्षित्! उनके कुलोंकी संख्या एक सौ एक थी॥ ४४॥
तन्निग्रहाय हरिणा प्रोक्ता देवा यदोः कुले।
अवतीर्णाः कुलशतं तेषामेकाधिकं नृप॥ ४४
उनका दमन करनेके लिये भगवान्की आज्ञासे देवताओंने ही यदुवंशमें अवतार लिया था। परीक्षित्! उनके कुलोंकी संख्या एक सौ एक थी॥ ४४॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.90.44 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 707) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/90/44/