श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.89.60

दशम स्कन्ध · अध्याय 89 · अथैकोननवतितमोऽध्यायः

पूर्णकामावपि युवां नरनारायणावृषी।

धर्ममाचरतां स्थित्यै ऋषभौ लोकसंग्रहम्॥ ६०

pūrṇakāmāvapi yuvāṃ naranārāyaṇāvṛṣī|

dharmamācaratāṃ sthityai ṛṣabhau lokasaṃgraham|| 60

अर्थ

तुम दोनों ऋषिवर नर और नारायण हो। यद्यपि तुम पूर्णकाम और सर्वश्रेष्ठ हो, फिर भी जगत‍्की स्थिति और लोकसंग्रहके लिये धर्मका आचरण करो’॥ ६०॥

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