श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
⌕

॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.89.59

दशम स्कन्ध · अध्याय 89 · अथैकोननवतितमोऽध्यायः

द्विजात्मजा मे युवयोर्दिदृक्षुणा

मयोपनीता भुवि धर्मगुप्तये।

कलावतीर्णाववनेर्भरासुरान्

हत्वेह भूयस्त्वरयेतमन्ति मे॥ ५९

dvijātmajā me yuvayordidṛkṣuṇā

mayopanītā bhuvi dharmaguptaye|

kalāvatīrṇāvavanerbharāsurān

hatveha bhūyastvarayetamanti me|| 59

अर्थ

‘श्रीकृष्ण और अर्जुन! मैंने तुम दोनोंको देखनेके लिये ही ब्राह्मणके बालक अपने पास मँगा लिये थे। तुम दोनोंने धर्मकी रक्षाके लिये मेरी कलाओंके साथ पृथ्वीपर अवतार ग्रहण किया है; पृथ्वीके भाररूप दैत्योंका संहार करके शीघ्र-से-शीघ्र तुमलोग फिर मेरे पास लौट आओ॥ ५९॥

पढ़नेकी विधि

अक्षरका आकार
सामान्य
अध्यायमें क्या दिखे
रोमन लिप्यन्तरण (IAST)
पंक्तियोंके बीच
रंग
सहायता

ये विकल्प केवल इसी ब्राउज़रमें रहते हैं; कहीं भेजे नहीं जाते। कुंजियाँ: ?

↑ ↓ चुनें · Enter खोलें · Esc बन्द

कुंजियाँ

←→
पिछला या अगला पृष्ठ (श्लोक, या अध्याय)
/
खोज
CtrlK
किसी अध्याय या श्लोकपर सीधे जाएँ (Mac: ⌘ K)
AltA
पढ़नेकी विधि
?
यह सूची
Esc
खुली सूची बन्द करें