श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.89.61

दशम स्कन्ध · अध्याय 89 · अथैकोननवतितमोऽध्यायः

इत्यादिष्टौ भगवता तौ कृष्णौ परमेष्ठिना।

ओमित्यानम्य भूमानमादाय द्विजदारकान्॥ ६१

ityādiṣṭau bhagavatā tau kṛṣṇau parameṣṭhinā|

omityānamya bhūmānamādāya dvijadārakān|| 61

अर्थ

जब भगवान् भूमा पुरुषने श्रीकृष्ण और अर्जुनको इस प्रकार आदेश दिया, तब उन लोगोंने उसे स्वीकार करके उन्हें नमस्कार किया और बड़े आनन्दके साथ ब्राह्मण-बालकोंको लेकर जिस रास्तेसे, जिस प्रकार आये थे, उसीसे वैसे ही द्वारकामें लौट आये। ब्राह्मणके बालक अपनी आयुके अनुसार बड़े-बड़े हो गये थे। उनका रूप और आकृति वैसी ही थी, जैसी उनके जन्मके समय थी। उन्हें भगवान् श्रीकृष्ण और अर्जुनने उनके पिताको सौंप दिया॥ ६१-६२॥

यह अर्थ श्लोक 61–62 का एक साथ है, जैसा मुद्रित ग्रन्थमें।

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