‘ब्रह्मन्! आपके निवासस्थान द्वारकामें कोई धनुषधारी क्षत्रिय नहीं है क्या? मालूम होता है कि ये यदुवंशी ब्राह्मण हैं और प्रजापालनका परित्याग करके किसी यज्ञमें बैठे हुए हैं!॥ २८॥✎ 897
किंस्विद् ब्रह्मंस्त्वन्निवासे इह नास्ति धनुर्धरः।
राजन्यबन्धुरेते वै ब्राह्मणाः सत्र आसते॥ २८
‘ब्रह्मन्! आपके निवासस्थान द्वारकामें कोई धनुषधारी क्षत्रिय नहीं है क्या? मालूम होता है कि ये यदुवंशी ब्राह्मण हैं और प्रजापालनका परित्याग करके किसी यज्ञमें बैठे हुए हैं!॥ २८॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.89.28 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 696) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/89/28/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)