श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.89.11

दशम स्कन्ध · अध्याय 89 · अथैकोननवतितमोऽध्यायः

पुनीहि सहलोकं मां लोकपालांश्‍च मद्गतान्।

पादोदकेन भवतस्तीर्थानां तीर्थकारिणा॥ ११

punīhi sahalokaṃ māṃ lokapālāṃśca madgatān|

pādodakena bhavatastīrthānāṃ tīrthakāriṇā|| 11

अर्थ

और बोले—‘महर्षे! आपके चरणोंका जल तीर्थोंको भी तीर्थ बनानेवाला है। आप उससे वैकुण्ठलोक, मुझे और मेरे अन्दर रहनेवाले लोकपालोंको पवित्र कीजिये॥ ११॥

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