॥ श्रीहरिः ॥
पुनीहि सहलोकं मां लोकपालांश्च मद्गतान्।
पादोदकेन भवतस्तीर्थानां तीर्थकारिणा॥ ११
punīhi sahalokaṃ māṃ lokapālāṃśca madgatān|
pādodakena bhavatastīrthānāṃ tīrthakāriṇā|| 11
अर्थ
और बोले—‘महर्षे! आपके चरणोंका जल तीर्थोंको भी तीर्थ बनानेवाला है। आप उससे वैकुण्ठलोक, मुझे और मेरे अन्दर रहनेवाले लोकपालोंको पवित्र कीजिये॥ ११॥
पुनीहि सहलोकं मां लोकपालांश्च मद्गतान्।
पादोदकेन भवतस्तीर्थानां तीर्थकारिणा॥ ११
और बोले—‘महर्षे! आपके चरणोंका जल तीर्थोंको भी तीर्थ बनानेवाला है। आप उससे वैकुण्ठलोक, मुझे और मेरे अन्दर रहनेवाले लोकपालोंको पवित्र कीजिये॥ ११॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.89.11 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 694) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/89/11/