॥ श्रीहरिः ॥
अतीव कोमलौ तात चरणौ ते महामुने।
इत्युक्त्वा विप्रचरणौ मर्दयन् स्वेन पाणिना॥ १०
atīva komalau tāta caraṇau te mahāmune|
ityuktvā vipracaraṇau mardayan svena pāṇinā|| 10
अर्थ
महामुने! आपके चरणकमल अत्यन्त कोमल हैं।’ यों कहकर भृगुजीके चरणोंको भगवान् अपने हाथोंसे सहलाने लगे॥ १०॥
अतीव कोमलौ तात चरणौ ते महामुने।
इत्युक्त्वा विप्रचरणौ मर्दयन् स्वेन पाणिना॥ १०
महामुने! आपके चरणकमल अत्यन्त कोमल हैं।’ यों कहकर भृगुजीके चरणोंको भगवान् अपने हाथोंसे सहलाने लगे॥ १०॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.89.10 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 694) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/89/10/