श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.89.12

दशम स्कन्ध · अध्याय 89 · अथैकोननवतितमोऽध्यायः

अद्याहं भगवँल्लक्ष्म्या आसमेकान्तभाजनम्।

वत्स्यत्युरसि मे भूतिर्भवत्पादहतांहसः॥ १२

adyāhaṃ bhagavam̐llakṣmyā āsamekāntabhājanam|

vatsyatyurasi me bhūtirbhavatpādahatāṃhasaḥ|| 12

अर्थ

भगवन्! आपके चरणकमलोंके स्पर्शसे मेरे सारे पाप धुल गये। आज मैं लक्ष्मीका एकमात्र आश्रय हो गया। अब आपके चरणोंसे चिह्नित मेरे वक्षःस्थलपर लक्ष्मी सदा-सर्वदा निवास करेंगी’॥ १२॥

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