श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.86.53

दशम स्कन्ध · अध्याय 86 · अथ षडशीतितमोऽध्यायः

ब्राह्मणो जन्मना श्रेयान् सर्वेषां प्राणिनामिह।

तपसा विद्यया तुष्ट्या किमु मत्कलया युतः॥ ५३

brāhmaṇo janmanā śreyān sarveṣāṃ prāṇināmiha|

tapasā vidyayā tuṣṭyā kimu matkalayā yutaḥ|| 53

अर्थ

श्रुतदेव! जगत‍्में ब्राह्मण जन्मसे ही सब प्राणियोंसे श्रेष्ठ हैं। यदि वह तपस्या, विद्या, सन्तोष और मेरी उपासना—मेरी भक्तिसे युक्त हो तब तो कहना ही क्या है॥ ५३॥

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