॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 10.86.24
स्वानुग्रहाय सम्प्राप्तं मन्वानौ तं जगद्गुरुम्।
मैथिलः श्रुतदेवश्च पादयोः पेततुः प्रभोः॥ २४
svānugrahāya samprāptaṃ manvānau taṃ jagadgurum|
maithilaḥ śrutadevaśca pādayoḥ petatuḥ prabhoḥ|| 24
अर्थ
मिथिलानरेश बहुलाश्व और श्रुतदेवने, यह समझकर कि जगद्गुरु भगवान् श्रीकृष्ण हम-लोगोंपर अनुग्रह करनेके लिये ही पधारे हैं, उनके चरणोंपर गिरकर प्रणाम किया॥ २४॥