बहुलाश्व और श्रुतदेव दोनोंने ही एक साथ हाथ जोड़कर मुनि-मण्डलीके सहित भगवान् श्रीकृष्णको आतिथ्य ग्रहण करनेके लिये निमन्त्रित किया॥ २५॥
न्यमन्त्रयेतां दाशार्हमातिथ्येन सह द्विजैः।
मैथिलः श्रुतदेवश्च युगपत् संहतांजली॥ २५
बहुलाश्व और श्रुतदेव दोनोंने ही एक साथ हाथ जोड़कर मुनि-मण्डलीके सहित भगवान् श्रीकृष्णको आतिथ्य ग्रहण करनेके लिये निमन्त्रित किया॥ २५॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.86.25 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 663) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/86/25/