॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 10.86.23
दृष्ट्वा त उत्तमश्लोकं प्रीत्युत्फुल्लाननाशयाः।
कैर्धृतांजलिभिर्नेमुः श्रुतपूर्वांस्तथा मुनीन्॥ २३
dṛṣṭvā ta uttamaślokaṃ prītyutphullānanāśayāḥ|
kairdhṛtāṃjalibhirnemuḥ śrutapūrvāṃstathā munīn|| 23
अर्थ
भगवान् श्रीकृष्णका दर्शन करके उनके हृदय और मुखकमल प्रेम और आनन्दसे खिल उठे। उन्होंने भगवान्को तथा उन मुनियोंको, जिनका नाम केवल सुन रखा था, देखा न था—हाथ जोड़ मस्तक झुकाकर प्रणाम किया॥ २३॥