॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 10.86.19
तत्र तत्र तमायान्तं पौरा जानपदा नृप।
उपतस्थुः सार्घ्यहस्ता ग्रहैः सूर्यमिवोदितम्॥ १९
tatra tatra tamāyāntaṃ paurā jānapadā nṛpa|
upatasthuḥ sārghyahastā grahaiḥ sūryamivoditam|| 19
अर्थ
परीक्षित्! वे जहाँ-जहाँ पहुँचते, वहाँ-वहाँकी नागरिक और ग्रामवासी प्रजा पूजाकी सामग्री लेकर उपस्थित होती। पूजा करनेवालोंको भगवान् ऐसे जान पड़ते, मानो ग्रहोंके साथ साक्षात् सूर्यनारायण उदय हो रहे हों॥ १९॥