श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
⌕

॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.86.18

दशम स्कन्ध · अध्याय 86 · अथ षडशीतितमोऽध्यायः

नारदो वामदेवोऽत्रिः कृष्णो रामोऽसितोऽरुणिः।

अहं बृहस्पतिः कण्वो मैत्रेयश्‍च्यवनादयः॥ १८

nārado vāmadevo'triḥ kṛṣṇo rāmo'sito'ruṇiḥ|

ahaṃ bṛhaspatiḥ kaṇvo maitreyaścyavanādayaḥ|| 18

अर्थ

भगवान्‌के साथ नारद, वामदेव, अत्रि, वेदव्यास, परशुराम, असित, आरुणि, मैं (शुकदेव), बृहस्पति, कण्व, मैत्रेय, च्यवन आदि ऋषि भी थे॥ १८॥

पढ़नेकी विधि

अक्षरका आकार
सामान्य
अध्यायमें क्या दिखे
रोमन लिप्यन्तरण (IAST)
पंक्तियोंके बीच
रंग
सहायता

ये विकल्प केवल इसी ब्राउज़रमें रहते हैं; कहीं भेजे नहीं जाते। कुंजियाँ: ?

↑ ↓ चुनें · Enter खोलें · Esc बन्द

कुंजियाँ

←→
पिछला या अगला पृष्ठ (श्लोक, या अध्याय)
/
खोज
CtrlK
किसी अध्याय या श्लोकपर सीधे जाएँ (Mac: ⌘ K)
AltA
पढ़नेकी विधि
?
यह सूची
Esc
खुली सूची बन्द करें