परीक्षित्! भगवान् श्रीकृष्ण, बलरामजी तथा उग्रसेन आदिने नन्दबाबा एवं अन्य सब गोपोंकी बहुत बड़ी-बड़ी सामग्रियोंसे अर्चा-पूजा की; उनका सत्कार किया; और वे प्रेम-परवश होकर बहुत दिनोंतक वहीं रहे॥ ५९॥✎ 14411442
नन्दस्तु सह गोपालैर्बृहत्या पूजयार्चितः।
कृष्णरामोग्रसेनाद्यैर्न्यवात्सीद् बन्धुवत्सलः॥ ५९
परीक्षित्! भगवान् श्रीकृष्ण, बलरामजी तथा उग्रसेन आदिने नन्दबाबा एवं अन्य सब गोपोंकी बहुत बड़ी-बड़ी सामग्रियोंसे अर्चा-पूजा की; उनका सत्कार किया; और वे प्रेम-परवश होकर बहुत दिनोंतक वहीं रहे॥ ५९॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.84.59 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 650) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/84/59/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)
#1441 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): हृदमें—रामहृदमें → हृदमें—रामह्रदमें
#1442 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): हृदमें—रामह्रदमें → ह्रदमें—रामह्रदमें