श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.84.59

दशम स्कन्ध · अध्याय 84 · अथ चतुरशीतितमोऽध्यायः

नन्दस्तु सह गोपालैर्बृहत्या पूजयार्चितः।

कृष्णरामोग्रसेनाद्यैर्न्यवात्सीद् बन्धुवत्सलः॥ ५९

nandastu saha gopālairbṛhatyā pūjayārcitaḥ|

kṛṣṇarāmograsenādyairnyavātsīd bandhuvatsalaḥ|| 59

अर्थ

परीक्षित्! भगवान् श्रीकृष्ण, बलरामजी तथा उग्रसेन आदिने नन्दबाबा एवं अन्य सब गोपोंकी बहुत बड़ी-बड़ी सामग्रियोंसे अर्चा-पूजा की; उनका सत्कार किया; और वे प्रेम-परवश होकर बहुत दिनोंतक वहीं रहे॥ ५९॥✎ 1441 1442

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)
  • #1441 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): हृदमें—रामहृदमें → हृदमें—रामह्रदमें
  • #1442 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): हृदमें—रामह्रदमें → ह्रदमें—रामह्रदमें

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