॥ श्रीहरिः ॥
अथोचुर्मुनयो राजन्नाभाष्यानकदुन्दुभिम्।
सर्वेषां शृण्वतां राज्ञां तथैवाच्युतरामयोः॥ ३४
athocurmunayo rājannābhāṣyānakadundubhim|
sarveṣāṃ śṛṇvatāṃ rājñāṃ tathaivācyutarāmayoḥ|| 34
अर्थ
परीक्षित्! इसके बाद ऋषियोंने भगवान् श्रीकृष्ण, बलरामजी और अन्यान्य राजाओंके सामने ही वसुदेवजीको सम्बोधित करके कहा—॥ ३४॥
अथोचुर्मुनयो राजन्नाभाष्यानकदुन्दुभिम्।
सर्वेषां शृण्वतां राज्ञां तथैवाच्युतरामयोः॥ ३४
परीक्षित्! इसके बाद ऋषियोंने भगवान् श्रीकृष्ण, बलरामजी और अन्यान्य राजाओंके सामने ही वसुदेवजीको सम्बोधित करके कहा—॥ ३४॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.84.34 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 647) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/84/34/