श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.82.36

दशम स्कन्ध · अध्याय 82 · अथ द‍्व्यशीतितमोऽध्यायः

तावात्मासनमारोप्य बाहुभ्यां परिरभ्य च।

यशोदा च महाभागा सुतौ विजहतुः शुचः॥ ३६

tāvātmāsanamāropya bāhubhyāṃ parirabhya ca|

yaśodā ca mahābhāgā sutau vijahatuḥ śucaḥ|| 36

अर्थ

महाभाग्यवती यशोदाजी और नन्दबाबाने दोनों पुत्रोंको अपनी गोदमें बैठा लिया और भुजाओंसे उनका गाढ़ आलिंगन किया। उनके हृदयमें चिरकालतक न मिलनेका जो दुःख था, वह सब मिट गया॥ ३६॥

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