na kiṃcanocatuḥ premṇā sāśrukaṇṭhau kurūdvaha|| 35
अर्थ
भगवान् श्रीकृष्ण और बलरामजीने माता यशोदा और पिता नन्दजीके हृदयसे लगकर उनके चरणोंमें प्रणाम किया। परीक्षित्! उस समय प्रेमके उद्रेकसे दोनों भाइयोंका गला रुँध गया, वे कुछ भी बोल न सके॥ ३५॥
कृष्णरामौ परिष्वज्य पितरावभिवाद्य च।
न किंचनोचतुः प्रेम्णा साश्रुकण्ठौ कुरूद्वह॥ ३५
भगवान् श्रीकृष्ण और बलरामजीने माता यशोदा और पिता नन्दजीके हृदयसे लगकर उनके चरणोंमें प्रणाम किया। परीक्षित्! उस समय प्रेमके उद्रेकसे दोनों भाइयोंका गला रुँध गया, वे कुछ भी बोल न सके॥ ३५॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.82.35 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 634) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/82/35/