उन्होंने अपनी पत्नीके साथ बड़े प्रेमसे अपने महलमें प्रवेश किया। उनका महल क्या था, मानो देवराज इन्द्रका निवासस्थान। इसमें मणियोंके सैकड़ों खंभे खड़े थे॥ २८॥
प्रीतः स्वयं तया युक्तः प्रविष्टो निजमन्दिरम्।
मणिस्तम्भशतोपेतं महेन्द्रभवनं यथा॥ २८
उन्होंने अपनी पत्नीके साथ बड़े प्रेमसे अपने महलमें प्रवेश किया। उनका महल क्या था, मानो देवराज इन्द्रका निवासस्थान। इसमें मणियोंके सैकड़ों खंभे खड़े थे॥ २८॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.81.28 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 627) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/81/28/