श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.80.8

दशम स्कन्ध · अध्याय 80 · अथाशीतितमोऽध्यायः

पतिव्रता पतिं प्राह म्लायता वदनेन सा।

दरिद्रा सीदमाना सा वेपमानाभिगम्य च॥ ८

pativratā patiṃ prāha mlāyatā vadanena sā|

daridrā sīdamānā sā vepamānābhigamya ca|| 8

अर्थ

एक दिन दरिद्रताकी प्रतिमूर्ति दुःखिनी पतिव्रता भूखके मारे काँपती हुई अपने पतिदेवके पास गयी और मुरझाये हुए मुँहसे बोली—॥ ८॥

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