श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.80.14

दशम स्कन्ध · अध्याय 80 · अथाशीतितमोऽध्यायः

याचित्वा चतुरो मुष्टीन् विप्रान् पृथुकतण्डुलान्।

चैलखण्डेन तान् बद‍्ध्वा भर्त्रे प्रादादुपायनम्॥ १४

yācitvā caturo muṣṭīn viprān pṛthukataṇḍulān|

cailakhaṇḍena tān baddhvā bhartre prādādupāyanam|| 14

अर्थ

तब उस ब्राह्मणीने पास-पड़ोसके ब्राह्मणोंके घरसे चार मुट्ठी चिउड़े माँगकर एक कपड़ेमें बाँध दिये और भगवान्‌को भेंट देनेके लिये अपने पतिदेवको दे दिये॥ १४॥

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