तब उस ब्राह्मणीने पास-पड़ोसके ब्राह्मणोंके घरसे चार मुट्ठी चिउड़े माँगकर एक कपड़ेमें बाँध दिये और भगवान्को भेंट देनेके लिये अपने पतिदेवको दे दिये॥ १४॥
याचित्वा चतुरो मुष्टीन् विप्रान् पृथुकतण्डुलान्।
चैलखण्डेन तान् बद्ध्वा भर्त्रे प्रादादुपायनम्॥ १४
तब उस ब्राह्मणीने पास-पड़ोसके ब्राह्मणोंके घरसे चार मुट्ठी चिउड़े माँगकर एक कपड़ेमें बाँध दिये और भगवान्को भेंट देनेके लिये अपने पतिदेवको दे दिये॥ १४॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.80.14 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 621) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/80/14/