श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.79.21

दशम स्कन्ध · अध्याय 79 · अथैकोनाशीतितमोऽध्यायः

प्रविश्य रेवामगमद् यत्र माहिष्मती पुरी।

मनुतीर्थमुपस्पृश्य प्रभासं पुनरागमत्॥ २१

praviśya revāmagamad yatra māhiṣmatī purī|

manutīrthamupaspṛśya prabhāsaṃ punarāgamat|| 21

अर्थ

वहाँ होकर वे नर्मदाजीके तटपर गये। परीक्षित्! इस पवित्र नदीके तटपर ही माहिष्मतीपुरी है। वहाँ मनुतीर्थमें स्नान करके वे फिर प्रभासक्षेत्रमें चले आये॥ २१॥

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