वहाँ होकर वे नर्मदाजीके तटपर गये। परीक्षित्! इस पवित्र नदीके तटपर ही माहिष्मतीपुरी है। वहाँ मनुतीर्थमें स्नान करके वे फिर प्रभासक्षेत्रमें चले आये॥ २१॥
प्रविश्य रेवामगमद् यत्र माहिष्मती पुरी।
मनुतीर्थमुपस्पृश्य प्रभासं पुनरागमत्॥ २१
वहाँ होकर वे नर्मदाजीके तटपर गये। परीक्षित्! इस पवित्र नदीके तटपर ही माहिष्मतीपुरी है। वहाँ मनुतीर्थमें स्नान करके वे फिर प्रभासक्षेत्रमें चले आये॥ २१॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.79.21 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 617) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/79/21/