श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.79.20

दशम स्कन्ध · अध्याय 79 · अथैकोनाशीतितमोऽध्यायः

आर्यां द्वैपायनीं दृष्ट्वा शूर्पारकमगाद् बलः।

तापीं पयोष्णीं निर्विन्ध्यामुपस्पृश्याथ दण्डकम्॥ २०

āryāṃ dvaipāyanīṃ dṛṣṭvā śūrpārakamagād balaḥ|

tāpīṃ payoṣṇīṃ nirvindhyāmupaspṛśyātha daṇḍakam|| 20

अर्थ

वहाँसे जलसे घिरे द्वीपमें निवास करनेवाली आर्यादेवीका दर्शन करने गये और फिर उस द्वीपसे चलकर शूर्पारक-क्षेत्रकी यात्रा की, इसके बाद तापी, पयोष्णी और निर्विन्ध्या नदियोंमें स्नान करके वे दण्डकारण्यमें आये॥ २०॥

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