ततश्च भारतं वर्षं परीत्य सुसमाहितः।
चरित्वा द्वादश मासांस्तीर्थस्नायी विशुद्ध्यसे॥ ४०
इसके बाद आप एकाग्रचित्तसे तीर्थोंमें स्नान करते हुए बारह महीनोंतक भारतवर्षकी परिक्रमा करते हुए विचरण कीजिये। इससे आपकी शुद्धि हो जायगी॥ ४०॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.78.40 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 615) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/78/40/