श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.78.39

दशम स्कन्ध · अध्याय 78 · अथाष्टसप्ततितमोऽध्यायः

तं पापं जहि दाशार्ह तन्‍नः शुश्रूषणं परम्।

पूयशोणितविण्मूत्रसुरामांसाभिवर्षिणम्॥ ३९

taṃ pāpaṃ jahi dāśārha tannaḥ śuśrūṣaṇaṃ param|

pūyaśoṇitaviṇmūtrasurāmāṃsābhivarṣiṇam|| 39

अर्थ

यदुनन्दन! वह यहाँ आकर पीब, खून, विष्ठा, मूत्र, शराब और मांसकी वर्षा करने लगता है। आप उस पापीको मार डालिये। हमलोगोंकी यह बहुत बड़ी सेवा होगी॥ ३९॥

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