॥ श्रीहरिः ॥
अथैकोनाशीतितमोऽध्यायः
बल्वलका उद्धार और बलरामजीकी तीर्थयात्रा
श्रीशुक उवाच
ततः पर्वण्युपावृत्ते प्रचण्डः पांसुवर्षणः।
भीमो वायुरभूद् राजन् पूयगन्धस्तु सर्वशः॥ १
tataḥ parvaṇyupāvṛtte pracaṇḍaḥ pāṃsuvarṣaṇaḥ|
bhīmo vāyurabhūd rājan pūyagandhastu sarvaśaḥ|| 1
अर्थ
श्रीशुकदेवजी कहते हैं—परीक्षित्! पर्वका दिन आनेपर बड़ा भयंकर अंधड़ चलने लगा। धूलकी वर्षा होने लगी और चारों ओरसे पीबकी दुर्गन्ध आने लगी॥ १॥✎ 1714
ततः पर्वण्युपावृत्ते प्रचण्डः पांसुवर्षणः।
भीमो वायुरभूद् राजन् पूयगन्धस्तु सर्वशः॥ १
श्रीशुकदेवजी कहते हैं—परीक्षित्! पर्वका दिन आनेपर बड़ा भयंकर अंधड़ चलने लगा। धूलकी वर्षा होने लगी और चारों ओरसे पीबकी दुर्गन्ध आने लगी॥ १॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.79.1 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 615) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/79/1/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
- #1714 पंक्तिके अन्तका योजक-चिह्न: करने-वाले → करनेवाले