श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.79.1

दशम स्कन्ध · अध्याय 79 · अथैकोनाशीतितमोऽध्यायः

अथैकोनाशीतितमोऽध्यायः

बल्वलका उद्धार और बलरामजीकी तीर्थयात्रा

श्रीशुक उवाच

ततः पर्वण्युपावृत्ते प्रचण्डः पांसुवर्षणः।

भीमो वायुरभूद् राजन् पूयगन्धस्तु सर्वशः॥ १

tataḥ parvaṇyupāvṛtte pracaṇḍaḥ pāṃsuvarṣaṇaḥ|

bhīmo vāyurabhūd rājan pūyagandhastu sarvaśaḥ|| 1

अर्थ

श्रीशुकदेवजी कहते हैं—परीक्षित्! पर्वका दिन आनेपर बड़ा भयंकर अंधड़ चलने लगा। धूलकी वर्षा होने लगी और चारों ओरसे पीबकी दुर्गन्ध आने लगी॥ १॥✎ 1714

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1714 पंक्तिके अन्तका योजक-चिह्न: करने-वाले → करनेवाले

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